कक्षा 7 Hindi (Malhar) अध्याय 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया
अच्छा बच्चों, ज़रा सोचो — कभी तुमने देखा है कि कुछ बातें इतनी सच्ची होती हैं कि लोग उन्हें कहावत की तरह बार-बार दोहराते हैं? जैसे 'बिना बिचारे जो करै सो पाछे पिछताय' — मतलब बिना सोचे-समझे काम करने से बाद में पछतावा होता है। या फिर 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेइ' — यानी बीती बात को भूल जाओ और आगे की चिंता करो। अरे वाह, ये लाइनें तो तुम्हारे घर-गाँव में भी सुनने को मिलती होंगी ना?
▶ वीडियो पाठ देखो🧑🏫 AI सुपर टीचर से पढ़ो⬇ अध्याय PDF📝 प्रश्न-उत्तर PDFइस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
- कुंडलिया क्या है और गिरिधर कविराय का परिचय
- पहली कुंडलिया का अर्थ और व्याख्या
- दूसरी कुंडलिया का अर्थ और व्याख्या
- कुंडलिया की रचना विशेषताएँ
- काल से जुड़े शब्द और उनके प्रयोग
- मन और चित्त से जुड़े शब्द
- खान-पान, सम्मान, राग-रंग का अर्थ
- पाठ की सीख का जीवन में उपयोग
- अनुमान, कल्पना और कहानी रचना
- कविता की मात्रा और पहेली
वीडियो पाठ (2 भाग)
अध्याय का सारांश
संक्षेप में — तो बच्चों, याद रखना — कुंडलिया छोटी दो-चार पंक्ति वाली कविता है जो नीति सिखाती है, गिरिधर कविराय अठारहवीं सदी के कवि थे जिनकी ये रचनाएँ आज भी कहावत बनकर हमारे काम आती हैं, जैसे बिना सोचे काम मत करो और बीती बात भूल जाओ।
संक्षेप में — तो बच्चो, याद रखना — बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछताय, काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय, फिर चित में चैन न पावै, खाना-पीना सम्मान कुछ अच्छा नहीं लगता, मन में खटकता रहता है। सोच-समझकर काम करो, तभी जीवन में चैन मिलेगा।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — बोर्ड एग्जाम में कुंडलिया की परिभाषा और गिरिधर कविराय का परिचय जरूर पूछा जाता है, उदाहरण के साथ लिखना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — बोर्ड परीक्षा में इस कुंडलिया का अर्थ और नुकसान पूछे जाते हैं, तीनों बातें — पछतावा, हँसी, चैन न मिलना — जरूर लिखना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — बोर्ड एग्जाम में यह कुंडलिया अर्थ के साथ लिखनी आनी चाहिए, खासकर 'अतीत भूलकर भविष्य पर ध्यान' वाला भाग अक्सर पूछा जाता है।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — एग्जाम में अक्सर पूछा जाता है — दोनों कुंडलियों की साझा और विशिष्ट रचना विशेषताएँ लिखो, उदाहरण सहित।
आम गलतियाँ — इनसे बचें
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यहाँ यह गलती करते हैं कि कुंडलिया को पूरी लंबी कविता समझ लेते हैं, जबकि ये सिर्फ दो-चार पंक्तियों की छोटी-सी बात होती है — ध्यान से गिनकर देखना।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यहाँ यह गलती करते हैं कि सिर्फ पहली लाइन पढ़कर सोच लेते हैं बस पछतावा होता है, लेकिन पूरा अर्थ भूल जाते हैं — जग में हँसी और मन का चैन न मिलना भी साथ आता है।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यहाँ गलती करते हैं — पूरी कुंडलिया पढ़कर भी सिर्फ 'बीती ताहि बिसार दे' याद रखते हैं, बाकी लाइनों का मतलब जोड़कर नहीं देखते, इसलिए पूरा भाव समझ नहीं आता।
याद रखने की आसान ट्रिक
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — कुंडलिया = कुंडली जैसी घुमावदार लेकिन छोटी, बस दो पंक्ति में घूम-घूमकर सीख देती है।
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — बीती-आगे, बीती-आगे — पुरानी बात भूल, नई राह पकड़ो, याद रहेगा!
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे स्कूल में बिना सोचे होमवर्क न करके खेलने चले गए तो टीचर डाँटती हैं — ठीक 'बिना बिचारे जो करै' वाली बात। घर में दादी कहती हैं 'बीती बात भूल जा, कल की तैयारी कर' — यही गिरिधर कविराय की कुंडलिया का मतलब।
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — गाँव में कोई किसान बिना सोचे अच्छी बारिश देखकर सारा बीज बो देता है, बाद में सूखा पड़ जाता है तो पछताता है और पड़ोस वाले हँसते हैं।
अभ्यास प्रश्न
अब खुद अभ्यास कीजिए — कुंडलिया कितनी पंक्तियों की होती है? गिरिधर कविराय किस सदी के थे? 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेइ' का मतलब क्या है? गिरिधर कविराय की कुंडलियाँ क्यों कहावतों की तरह इस्तेमाल होती हैं? एक उदाहरण देकर समझाइए।
अब खुद अभ्यास कीजिए — ‘बिना बिचारे जो करै’ का मतलब क्या है? पछताय का अर्थ बताओ। ‘जग में होत हँसाय’ का क्या अर्थ है और इससे क्या समझ आता है? पूरी कुंडलिया से समझाइए कि बिना बिचारे काम करने के तीन मुख्य नुकसान क्या हैं?
अब खुद अभ्यास कीजिए — ‘बीती ताहि बिसार दे’ का सरल मतलब क्या है? कुंडलिया हमें क्या सलाह देती है — अतीत याद रखने की या भूलने की? 'जो बिन आवै सहज में ताही में चित देइ' का अर्थ लिखो और बताओ यह जीवन में कैसे मदद करता है?
अब खुद अभ्यास कीजिए — कुंडलिया में अंतिम शब्द का क्या नियम है? दोनों कुंडलियों में साझा विशेषता क्या है? 'जग में होत हँसाय' में कौन-सी विशेषता है? समझाओ। दोनों कुंडलियों की साझा और विशिष्ट रचना विशेषताएँ लिखकर बताओ कि ये कविता को कैसे याद रखने लायक बनाती हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 7 Hindi (Malhar) अध्याय 6 'गिरिधर कविराय की कुंडलिया' कहाँ से पढ़ें?Invidya पर इस अध्याय के 2 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।
'गिरिधर कविराय की कुंडलिया' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?इस अध्याय के मुख्य विषय: कुंडलिया क्या है और गिरिधर कविराय का परिचय, पहली कुंडलिया का अर्थ और व्याख्या, दूसरी कुंडलिया का अर्थ और व्याख्या, कुंडलिया की रचना विशेषताएँ, काल से जुड़े शब्द और उनके प्रयोग, मन और चित्त से जुड़े शब्द।
क्या 'गिरिधर कविराय की कुंडलिया' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।
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