कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Indepen अध्याय 6: लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जो हमारे देश के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण है। सोचो, अगर एक दिन अचानक तुम्हें पता चले कि तुम खुलकर अपनी बात नहीं कह सकते, अखबारों में वो सब नहीं छप सकता जो सरकार को पसंद न हो, और बिना किसी ठोस कारण के किसी को भी जेल में डाला जा सकता है... कैसा लगेगा? ये कोई कहानी नहीं, बल्कि हमारे भारत में, 1975 में ऐसा ही कुछ हुआ था जब 'आपातकाल' घोषित कर दिया गया था।
▶ वीडियो पाठ देखो🧑🏫 AI सुपर टीचर से पढ़ो⬇ अध्याय PDF📝 प्रश्न-उत्तर PDFइस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
- आपातकाल की पृष्ठभूमि और कांग्रेस का बदलता स्वरूप
- आपातकाल के आर्थिक और राजनीतिक संदर्भ
- गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन
- न्यायपालिका से संघर्ष और संवैधानिक गतिरोध
- 1974 की रेल हड़ताल
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला और आपातकाल की घोषणा
- आपातकाल के परिणाम: प्रेस सेंसरशिप और मौलिक अधिकारों पर रोक
- निवारक नजरबंदी और सर्वोच्च न्यायालय का विवादास्पद फैसला
- संवैधानिक संशोधन और आपातकाल के विरोध
- आपातकाल के सबक
- 1977 के लोकसभा चुनाव और जनता पार्टी का उदय
- जनता सरकार का पतन और 1980 के मध्यावधि चुनाव
- आपातकाल की विरासत: दलीय प्रणाली और पिछड़ी जातियों की राजनीति
- संविधानिक और राजनीतिक संकट के रूप में आपातकाल
वीडियो पाठ (7 भाग)
अध्याय का सारांश
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने देखा कि 1975 में जो आपातकाल लगा, वो किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि 1971 के बाद से देश में आ रहे बड़े आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक बदलावों का नतीजा था। बढ़ती महंगाई, सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच के झगड़े, और विपक्ष के बड़े-बड़े आंदोलन - इन सबने मिलकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी जिसने आपातकाल का रास्ता साफ किया।
संक्षेप में — तो बच्चों, संक्षेप में कहें तो आपातकाल से पहले देश एक बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा था। 'गरीबी हटाओ' के नारे के बावजूद, बांग्लादेश युद्ध का खर्चा, तेल के बढ़ते दाम, और देश में महंगाई व बेरोजगारी की मार, इन सबने मिलकर आम जनता को बहुत परेशान किया। लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा था, और इसी असंतोष के माहौल ने आगे चलकर राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया, जिसका नतीजा आपातकाल था।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह अवधारणा बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आपातकाल के कारणों और उसकी पृष्ठभूमि पर सीधे प्रश्न आ सकते हैं, खासकर न्यायपालिका और सरकार के बीच के विवाद पर ध्यान देना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आपातकाल के कारणों में आर्थिक और राजनीतिक संदर्भों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाना सीखो।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। केशवानंद भारती मामले का सिद्धांत और सरकार-न्यायपालिका के बीच तनाव के कारणों को विस्तार से समझना और लिखना सीखें, क्योंकि अक्सर इस पर सीधा प्रश्न आता है।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय आपातकाल के कारणों और पृष्ठभूमि को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके प्रमुख बिंदुओं और प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।
आम गलतियाँ — इनसे बचें
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर आपातकाल को सिर्फ एक घटना मान लेते हैं, लेकिन ये समझना ज़रूरी है कि इसके पीछे कई सालों की घटनाएँ और कांग्रेस के अंदरूनी बदलाव थे। सिर्फ 1975 पर ध्यान देने से पूरी कहानी समझ नहीं आती।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर 1971 के 'गरीबी हटाओ' नारे और उसके बाद की आर्थिक स्थिति को लेकर थोड़ा confuse हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि नारा दिया तो गरीबी हट गई होगी।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह भूल जाते हैं कि जेपी ने 'संपूर्ण क्रांति' का नारा सिर्फ राजनीतिक बदलाव के लिए नहीं दिया था, बल्कि वो सामाजिक और आर्थिक बदलाव भी चाहते थे।
याद रखने की आसान ट्रिक
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — आपातकाल के पीछे तीन 'आ' याद रखो: 'आ'र्थिक संकट, 'आ'ंतरिक गड़बड़ी, और 'आ'रोप-प्रत्यारोप।
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — अरे वाह! देखो, इसे ऐसे याद रखो: 'गरीबी हटाओ' का नारा (1971), पर बांग्लादेश का भार (1971), फिर तेल का व्यापार (महंगा तेल), महंगाई का हाहाकार (कीमतें बढ़ीं) और नौकरी न मिले यार (बेरोजगारी)।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे स्कूल में जब कोई बड़ा नियम लागू होता है, तो उसके पीछे भी कई छोटी-छोटी घटनाएँ और समस्याओं का हाथ होता है।
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे जब अचानक परिवार में किसी की शादी या कोई बड़ा त्योहार आ जाए, तो हम देखते हैं ना, खर्चे कैसे बढ़ जाते हैं? देश पर बांग्लादेश युद्ध का कुछ वैसा ही बोझ था।
अभ्यास प्रश्न
अब खुद अभ्यास कीजिए — आपातकाल किस वर्ष घोषित किया गया था? आपातकाल की घोषणा के समय भारत की प्रधानमंत्री कौन थीं? न्यायपालिका और सरकार के बीच तनाव के क्या कारण थे? 1971 के बाद कांग्रेस के स्वरूप में क्या महत्वपूर्ण बदलाव आए?
अब खुद अभ्यास कीजिए — 1971 में कांग्रेस ने कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया था? बांग्लादेश संकट के दौरान कितने शरणार्थी भारत आए थे? अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा? 1971 के बाद की आर्थिक चुनौतियों ने जन असंतोष को कैसे बढ़ावा दिया?
अब खुद अभ्यास कीजिए — गुजरात में छात्र आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ? बिहार छात्र आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था? गुजरात और बिहार दोनों राज्यों में छात्र आंदोलनों के पीछे मुख्य कारण क्या थे? कोई दो कारण बताओ।
अब खुद अभ्यास कीजिए — न्यायपालिका और सरकार के बीच किस वर्ष गहरा संघर्ष देखने को मिला? केशवानंद भारती मामला कब हुआ था? सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष के किन्हीं दो मुख्य कारणों को बताएं। 'संविधान के बुनियादी ढांचे' के सिद्धांत का क्या महत्व है?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Indepen अध्याय 6 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' कहाँ से पढ़ें?Invidya पर इस अध्याय के 7 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।
'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?इस अध्याय के मुख्य विषय: आपातकाल की पृष्ठभूमि और कांग्रेस का बदलता स्वरूप, आपातकाल के आर्थिक और राजनीतिक संदर्भ, गुजरात और बिहार के छात्र आंदोलन, न्यायपालिका से संघर्ष और संवैधानिक गतिरोध, 1974 की रेल हड़ताल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला और आपातकाल की घोषणा।
क्या 'लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।
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