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कक्षा 9 Sanskrit (Shemushi) अध्याय 4: सूक्तिमौक्तिकम्

अच्छा बच्चों, ज़रा सोचो—स्कूल में अगर तुमने काम कल के लिए टाल दिया, तो क्या वह काम खुद हो जाता है? नहीं न। अब इसी तरह ज़िंदगी में भी एक नियम समझो: जो काम सही समय पर करते हैं, वही काम हमें फायदा देता है; और जो काम देर से करते हैं, उसका फल उल्टा भी हो सकता है। अब सुनो—यह अध्याय एक कथा से बात समझाता है।

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इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

वीडियो पाठ (7 भाग)

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अध्याय का सारांश

संक्षेप में — बच्चो, इस अध्याय की पहली सीख यही है कि कर्म अगर यथासमय—यानी सही समय पर—किया जाए, तो उसका फल लाभकारी होता है। कथा में आदमी ने दूध निकालने का काम देर से करने की कोशिश की, लेकिन जब समय आया तो दूध नहीं मिला और उल्टा नुकसान हुआ। इसलिए हमें हर काम अपने समय पर करना चाहिए, ताकि फल भी अच्छा मिले।
संक्षेप में — आज की सीख यह है कि कर्म यथासमय हो—ये तो हमने देखा। अब साथ-साथ बुद्धिमान व्यक्ति यह भी करता है कि वह उपाय सोचते समय ‘हानि’ की संभावना को भी देखे। इसलिए हानिरहित उपाय अपनाना नैतिक कर्तव्य है, सिर्फ दिखने में लाभ वाला उपाय पर्याप्त नहीं।

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें

बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — कथा के संदेश को एक लाइन में लिखो: यथासमय कार्य ही फलदायी।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — NCERT/board में अक्सर ‘उपायं चिन्तयेत्… तथापायं…’ से हानिरहित उपाय का आशय पूछा जाता है—दोनों भाग लिखना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — श्लोक 1 का अर्थ लिखते समय ‘वृत्त यत्न से’ और ‘वृत्त क्षीण → वित्त क्षीण’ जरूर लिखो।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — श्लोक 2 का भाव लिखो: अपने हित को पर के हित में बदलो, अहितकारी व्यवहार निषिद्ध।

आम गलतियाँ — इनसे बचें

रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं—“मैं बाद में कर लूँगा, फायदा हो जाएगा।” लेकिन यह कथा बताती है कि देर करते-करते लाभ की जगह नुकसान आ सकता है।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सिर्फ फायदा सोच लेते हैं—“काम हो जाएगा तो ठीक है”—लेकिन हानि क्या होगी, यह नहीं देखते; यही भूल उन्हें गलत निर्णय तक ले जाती है।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यही गलती करते हैं कि ‘धन’ को पहले और ‘चरित्र’ को बाद में रखते हैं—सोचते हैं, पहले पैसा हो जाए फिर सुधार लेंगे। श्लोक कहता है—पहले वृत्त बचाओ, क्योंकि वही वित्त को टिकाता है।

याद रखने की आसान ट्रिक

इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — यथासमय = फलतत्व। समय के साथ कर्म, फल साथ में। (य-सम-य याद रखो!)
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — लाभ भी सोचो, हानि भी सोचो—तभी ‘बुद्धिमान’ वाला उपाय सही।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में

इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — स्कूल की प्रार्थना—समय पर पहुँचोगे तो लाइन और पढ़ाई दोनों ठीक रहती है पढ़ाई—रोज़ थोड़ा-थोड़ा करोगे तो परीक्षा के दिन घबराहट नहीं होती सब्ज़ी/बीच के काम—समय पर पानी/देखभाल नहीं होगी तो फसल घट जाती है
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — स्कूल प्रोजेक्ट के लिए कॉपी करना—फौरन काम, पर परीक्षा/सीख का नुकसान खेत में कम मेहनत के लिए गलत दवा डालना—कीट मरेंगे, पर फसल खराब भी हो सकती है

अभ्यास प्रश्न

अब खुद अभ्यास कीजिए — यथासमय कर्म का फल कैसा होता है? कथा में आदमी ने क्या नुकसान उठाया? अगर रोज़ पढ़ाई को बार-बार टालो, तो समय पर कर्म वाले सिद्धान्त के हिसाब से नतीजा क्या हो सकता है? एक ही काम दो तरीकों से किया जाए: (1) समय पर, (2) देर से। नैतिक समझ के अनुसार दोनों में मुख्य अंतर क्या है?
अब खुद अभ्यास कीजिए — ‘हानिरहित उपाय का कर्तव्य’ का मतलब क्या है? सिर्फ लाभ देखकर निर्णय लेना ठीक है या नहीं? एक उपाय ‘काम जल्दी हो जाएगा’ ऐसा लगे, फिर भी आप हानि कैसे पहचानेंगे? किस परिस्थिति में अपाययुक्त उपाय ज्यादा खतरनाक हो जाता है? एक उदाहरण देकर समझाओ।
अब खुद अभ्यास कीजिए — श्लोक में किसे यत्न से संरक्षित करने को कहा गया है? वृत्त के क्षीण होने पर स्थिति कैसी बन सकती है? क्यों कहा गया है कि वित्त ‘वृत्त’ के साथ चलता है?
अब खुद अभ्यास कीजिए — अपने लिए जो सही और अच्छा लगता है, उसे हमें दूसरों के लिए क्या करना चाहिए? जो बात अपने लिए नुकसानदेह है, वह हमें दूसरों के साथ करनी चाहिए या नहीं? अगर टीचर की बात काटने से तुम्हें बुरा लगता है, तो कक्षा में तुम्हें क्या करना चाहिए?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 9 Sanskrit (Shemushi) अध्याय 4 'सूक्तिमौक्तिकम्' कहाँ से पढ़ें?

Invidya पर इस अध्याय के 7 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।

'सूक्तिमौक्तिकम्' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?

इस अध्याय के मुख्य विषय: समय पर कर्म का फल, हानिरहित उपाय का कर्तव्य, वित्त और वृत्त: यत्न से रक्षा, पर का प्रतिफल व स्वयं का धर्म-ज्ञान, प्रियवाक्य से संतोष, परोपकार और सत्संगति की शक्ति।

क्या 'सूक्तिमौक्तिकम्' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?

हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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