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कक्षा 9 Sanskrit (also used for Class 10) अध्याय 5: प्रत्यय

बच्चो, व्याकरण में असली मज़ा तब आता है जब आप देख लेते हैं कि एक ही धातु/शब्द से कितने सारे काम कैसे बनते हैं। जैसे— आप किसी काम के लिए कपड़े/औज़ार बदलते हो, वैसे ही संस्कृत में शब्द के पीछे कुछ “टुकड़े” जुड़ते हैं और शब्द का काम बदल जाता है। तो अब ध्यान से सुनो—“किसी धातु या शब्‍द के पश्चात् जुड़ने वाले शब्दांश” को हम प्रत्यय कहते हैं। यानी धातु/शब्द के पीछे जो छोटा-सा हिस्सा आता है, वही प्रत्यय है।

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इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

वीडियो पाठ (7 भाग)

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अध्याय का सारांश

संक्षेप में — आज हमने सीखा कि प्रत्यय क्या होता है—धातु या शब्द के पीछे जो शब्दांश जुड़ता है, वही प्रत्यय है। फिर तीन प्रकार साफ़ किए: धातु में जुड़ने वाले प्रत्यय कृत् प्रत्यय होते हैं, संज्ञा में जुड़ने वाले तद्धित प्रत्यय, और पुल्लिंग को स्त्रीलिंग में बदलने वाले स्त्री प्रत्यय। बस इतनी पहचान बन गई तो आगे के कृत्-तद्धित-स्त्री वाले प्रत्यय पढ़ना आसान हो जाएगा।
संक्षेप में — आज हमने कृत् प्रत्यय की मूल बात समझी—ये धातु में लगते हैं और अर्थ-निर्माण करते हैं। धातु में कृत् प्रत्यय जुड़कर कई तरह का पद बनाता है: कभी अव्यय (क्त्वावा, ल्यप्, तुमुन्), कभी विशेषण (शतृ, शानच्, तव्यत्, अनीयर्, यत्), कभी भूतकालिक/पूर्व-क्रिया का भाव (तव्यत्, अनीयर्, यत्), और कभी संज्ञा (तृच्, क्तिन्, णवुल्, ल्‍युयुट्)।

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें

बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — बोर्ड/टर्म परीक्षा में अक्सर “किस आधार पर कौन-सा प्रत्यय?” जैसा 1-मार्क प्रश्न आता है—इसी पर उत्तर लिखो।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — उत्तर लिखते समय ‘पद का प्रकार’ (अव्यय/विशेषण/संज्ञा) जरूर बताना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — उत्तर लिखते समय अर्थ जरूर लिखो: ‘करके’ (क्त्वा/ल्‍यप्) या ‘के लिए’ (तुमुन्)।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — वाक्य में जो संज्ञा विशेष्य है, उसी की विभक्ति-वचन पहचानकर शतृ/शानच् वाले शब्द को उसी से match करो।

आम गलतियाँ — इनसे बचें

रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर “कृत्” और “तद्धित” को उल्टा कर देते हैं—धातु में कृत् लगना चाहिए और संज्ञा में तद्धित। परीक्षा में यही गलती सबसे ज़्यादा होती है, इसलिए पहले पहचानो: शुरुआत धातु से है या संज्ञा से?
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर ये गलती करते हैं कि वे सिर्फ प्रत्यय का नाम याद कर लेते हैं, पर अर्थ-प्रकार (अव्यय/विशेषण/संज्ञा) नहीं जोड़ते। कृत् प्रत्यय का मतलब हर बार ‘क्या बना?’—यही देखना ज़रूरी है।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर उपसर्ग देखकर भी ‘क्त्वा’ लगा देते हैं—जब उपसर्ग हो तो सही है ‘ल्‍यप्’, यही सबसे बड़ा एरर होता है।

याद रखने की आसान ट्रिक

इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — कृत् = “क” धातु से, तद्धित = “त” संज्ञा से, स्त्री प्रत्यय = “स्त्री/लिंग बदलो” (पुल्लिंग → स्त्रीलिंग)।
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — ‘अ’ - अव्यय (क्त्वावा/ल्यप्/तुमुन्), ‘वि’ - विशेषण (शतृ/शानच्/तव्यत्…), ‘सं’ - संज्ञा (तृच्/क्तिन्…)—चार कटगरी याद रखो।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में

इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — गाँव में दाल में मसाला डालते ही स्वाद बदल जाता है—ऐसे ही प्रत्यय लगते ही शब्द का काम बदलता है। बेटा/बेटी के नाम में लिंग के अनुसार रूप बदलते हैं—वैसे ही स्त्री प्रत्यय पुल्लिंग को स्त्रीलिंग बनाता है।
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — सिलाई में धागा लगाकर कुर्ते का ‘रूप’ बन जाता है—वैसे धातु में कृत् प्रत्यय लगकर नया ‘पद-रूप’ बनता है। टीचर की ‘कक्षा-निर्देश’ वाली बात—छोटी होती है और जगह के हिसाब से वही रहती है—अव्यय जैसा भाव इसी तरह स्थिर रहता है।

अभ्यास प्रश्न

अब खुद अभ्यास कीजिए — प्रत्यय किसे कहते हैं? धातुओं में जुड़ने वाले प्रत्यय को क्या कहते हैं? संज्ञा-शब्दों में जुड़ने वाले प्रत्यय को क्या कहते हैं? जब प्रत्यय पुल्लिंग को स्त्रीलिंग में बदल दे, तो उसका प्रकार क्या होगा?
अब खुद अभ्यास कीजिए — कृत् प्रत्यय धातु में लगते हैं या शब्द में? ‘क्त्वावा’, ‘ल्यप्’, ‘तुमुन्’ किस प्रकार के पद बनाते हैं? कौन से प्रत्यय धातु से विशेषण बनाने में आते हैं: ‘शतृ’ या ‘तृच्’? भूतकालिक/पूर्व-क्रिया भाव वाले प्रयोग के लिए संकेत में कौन से प्रत्यय दिए हैं?
अब खुद अभ्यास कीजिए — ‘के लिए/मकसद’ अर्थ में कौन सा कृत् प्रत्यय लगता है? धातु से पहले उपसर्ग लगा हो तो ‘क्त्वा’ की जगह कौन सा प्रत्यय आएगा? ‘पढ़ना’ और ‘जाना’—यदि ‘जाना’ ‘पढ़ने के लिए’ है, तो ‘पढ़ना’ में कौन सा प्रत्यय लगेगा? वाक्य-भाव: “उड़कर, खगाः … प्रसन्नाना भवन्ति।
अब खुद अभ्यास कीजिए — लिख् + शानच् (आत्मनेपद) में ‘साथ-साथ करता हुआ’ भाव दिखाओ। (रूप का भाव बताओ) सेव् + शानच् का पुं. प्र. का मूल रूप क्या होगा? दिए गए वाक्य को साथ-साथ वाले भाव में बदलो: ‘बालिका पठति’ और ‘बालिका क्रीडति’—तुम्हें ‘करती हुई’ बालिका एक ही विशेषण से बतानी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 9 Sanskrit (also used for Class 10) अध्याय 5 'प्रत्यय' कहाँ से पढ़ें?

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'प्रत्यय' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?

इस अध्याय के मुख्य विषय: प्रत्यय की परिभाषा और प्रकार, कृत् प्रत्यय—अर्थ-निर्माण की मूल समझ, अव्यय बनाने वाले कृत् प्रत्यय: क्त्वा, ल्‍यप्, तुमुन्, शतृ और शानच् प्रत्यय—साथ-साथ होने वाला/करता हुआ, भूतकालिक क्रिया: क्त और क्तवतु, तव्यत्, अनीयर् और यत्-ण्यत्-क्यप्—‘चाहिए/योग्य’ के रूप।

क्या 'प्रत्यय' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?

हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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