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कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Independence) अध्याय 4: भारत के विदेश संबंध

अच्छा बच्चों, आज हम एक बहुत ही ज़रूरी और दिलचस्प बात करने जा रहे हैं – कि हमारा भारत देश जब आज़ाद हुआ, तो उसने दुनिया में अपने रिश्ते कैसे बनाए? ये ठीक वैसे ही है जैसे जब आप बड़े हो जाते हैं और अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठाने लगते हैं, तो आप सोचते हैं ना कि मुझे किसके साथ दोस्ती करनी है, किससे थोड़ा दूर रहना है, और क्या काम मुझे अकेले करना है?

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इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

वीडियो पाठ (6 भाग)

▶ भाग 1▶ भाग 2▶ भाग 3▶ भाग 4▶ भाग 5▶ भाग 6

अध्याय का सारांश

संक्षेप में — तो बच्चों, स्वतंत्र भारत की विदेश नीति सिर्फ़ भारत की अपनी सोच का नतीजा नहीं थी. बल्कि, जब हम आज़ाद हुए, उस समय दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ था, शीत युद्ध शुरू हो रहा था और पूरी दुनिया दो गुटों में बँट रही थी. साथ ही, बहुत सारे नए देश आज़ाद हो रहे थे जिनके सामने अपनी पहचान बनाने और विकास करने की चुनौतियाँ थीं. इन्हीं सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हमारे नेताओं ने अपनी विदेश नीति बनाई.
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने समझा कि कैसे हमारे पहले प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आज़ाद भारत की विदेश नीति की नींव रखी. उन्होंने 1946 से 1964 तक इस महत्वपूर्ण काम को संभाला. उनके तीन मुख्य उद्देश्य थे - हमारी मुश्किल से मिली आज़ादी को बचाना, देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना और तेज़ी से आर्थिक विकास करना. और इन सबको पाने के लिए उन्होंने गुटनिरपेक्षता की नीति को सबसे ऊपर रखा.

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें

बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह टॉपिक बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि भारत की शुरुआती विदेश नीति पर अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों का क्या प्रभाव पड़ा।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह प्रश्न सीधे-सीधे बोर्ड परीक्षा में 'नेहरू की विदेश नीति के मुख्य उद्देश्य' के रूप में आ सकता है, इसे अच्छे से याद कर लेना!
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह अवधारणा बोर्ड परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. गुटनिरपेक्षता की परिभाषा, इसके कारण, और बांडुंग सम्मेलन पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं. इसके सभी बिंदुओं को ध्यान से पढ़ना.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह टॉपिक बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. 1962 के युद्ध के कारण और परिणामों पर अक्सर सीधा सवाल आता है, इसलिए इसे अच्छे से तैयार कर लेना.

आम गलतियाँ — इनसे बचें

रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर ये भूल जाते हैं कि हमारी विदेश नीति सिर्फ़ दूसरों को देखकर नहीं बनी, बल्कि हमारे देश की अपनी ज़रूरतें, जैसे गरीबी हटाना और विकास करना, इनका भी बहुत बड़ा रोल था.
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि गुटनिरपेक्षता का मतलब है किसी से कोई संबंध ही न रखना, या तटस्थ रहना. नहीं! इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी की मदद नहीं करेंगे या किसी से बात नहीं करेंगे.
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह भूल जाते हैं कि नेहरू जी सिर्फ़ प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि विदेश मंत्री भी थे! और उनके तीन उद्देश्यों को आपस में मिला देते हैं या क्रम भूल जाते हैं.

याद रखने की आसान ट्रिक

इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — सोचो 'आज़ादी का चौराहा': विश्व युद्ध खत्म, नए देश बने, दो गुटों का रास्ता (शीत युद्ध), भारत बीच में खड़ा!
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — याद रखो: 'गुट से नहीं, हम खुद से'. मतलब हम किसी गुट के पीछे नहीं चलेंगे, अपने फैसले खुद लेंगे.

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में

इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे स्कूल में नया बच्चा आता है, वो देखता है कौन-कौन दोस्त हैं, कौन चुपचाप रहते हैं, और फिर अपनी दोस्ती तय करता है.
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — दो पड़ोसी परिवारों के बीच झगड़ा हो, और आपका परिवार किसी एक का पक्ष न लेकर दोनों से अच्छे संबंध बनाए रखे. क्रिकेट मैच में दो टीमें खेल रही हों, और आप किसी एक टीम के कट्टर समर्थक न बनकर, अच्छा खेल देखने का आनंद लें.

अभ्यास प्रश्न

अब खुद अभ्यास कीजिए — जब भारत आज़ाद हुआ, तब दुनिया में कौन सा बड़ा युद्ध अभी-अभी खत्म हुआ था? शीत युद्ध के दौरान दुनिया कितने प्रमुख गुटों में बँट रही थी? आज़ादी के समय नए देशों के सामने मुख्य घरेलू चुनौतियाँ क्या थीं?
अब खुद अभ्यास कीजिए — गुटनिरपेक्षता का मुख्य सिद्धांत क्या है? भारत ने किस ऐतिहासिक संघर्ष के बाद गुटनिरपेक्षता को अपनाया? गुटनिरपेक्षता की नीति के किन्हीं दो उद्देश्यों का उल्लेख करें।
अब खुद अभ्यास कीजिए — नेहरू जी प्रधानमंत्री के साथ-साथ और कौन से महत्वपूर्ण पद पर थे? नेहरू जी ने भारत की विदेश नीति का निर्माण और क्रियान्वयन कब से कब तक किया? नेहरू जी अपनी विदेश नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कौन सी मुख्य नीति अपनाना चाहते थे?
अब खुद अभ्यास कीजिए — भारत ने शीत युद्ध में कौन से दो खेमों से दूरी बनाई रखी? गुटनिरपेक्षता का मतलब तटस्थता (neutrality) था या स्वतंत्र नीति? गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाने से भारत को क्या लाभ हुआ?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Independence) अध्याय 4 'भारत के विदेश संबंध' कहाँ से पढ़ें?

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'भारत के विदेश संबंध' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?

इस अध्याय के मुख्य विषय: स्वतंत्र भारत की विदेश नीति का अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ, गुटनिरपेक्षता की नीति: सिद्धांत और उद्देश्य, जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति में भूमिका, दो खेमों से दूरी और एफ़्रो-एशियाई एकता, चीन के साथ शांति और संघर्ष (पंचशील और 1962 का युद्ध), पाकिस्तान के साथ युद्ध और शांति (1947, 1965, 1971)।

क्या 'भारत के विदेश संबंध' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?

हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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