कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Indepen अध्याय 2: एक दल के प्रभुत्व का दौर
आज हम अपनी राजनीति विज्ञान की किताब का एक बहुत ही दिलचस्प और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू करने जा रहे हैं – 'एक दल के प्रभुत्व का दौर'। सोचो बच्चों, जब हमारा देश आज़ाद हुआ, तो उस समय कैसी परिस्थितियाँ रही होंगी? हम सब ने मिलकर अंग्रेजों से आजादी तो पा ली थी, लेकिन अब सवाल यह था कि हमारा देश चलेगा कैसे? दूसरे देशों की तरह तानाशाही आएगी, या हम कोई और रास्ता चुनेंगे? इसी बारे में आज हम बात करेंगे.
▶ वीडियो पाठ देखो🧑🏫 AI सुपर टीचर से पढ़ो⬇ अध्याय PDF📝 प्रश्न-उत्तर PDFइस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
- लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती
- भारत के पहले आम चुनाव का आयोजन
- मतदान के बदलते तरीके
- पहले आम चुनाव (1952) का महत्व
- पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व
- केरल में कम्युनिस्टों की जीत और विवादास्पद बर्खास्तगी
- कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति
- कांग्रेस एक सामाजिक और विचारधारात्मक गठबंधन के रूप में
- गुटों में तालमेल और सहनशीलता (कांग्रेस प्रणाली)
- प्रमुख विपक्षी दलों का उद्भव: सोशलिस्ट पार्टी (एसपी)
- प्रमुख विपक्षी दलों का उद्भव: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई)
- प्रमुख विपक्षी दलों का उद्भव: भारतीय जनसंघ (बीजेएस)
- विपक्षी पार्टियों की भूमिका और महत्व
वीडियो पाठ (6 भाग)
अध्याय का सारांश
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने देखा कि भारत में लोकतंत्र की नींव कैसे रखी गई। 1950 में चुनाव आयोग बना और सुकुमार सेन जी ने एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी संभाली। इतने बड़े देश में, जहाँ ज़्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, वहाँ 17 करोड़ मतदाताओं के लिए निष्पक्ष चुनाव करवाना कोई मज़ाक नहीं था। यह सचमुच हिमालय पर चढ़ने जैसा कठिन काम था, लेकिन हमने यह कर दिखाया! इसी वजह से भारत का पहला आम चुनाव दुनिया के लिए एक मिसाल बना।
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने मतदान के बदलते तरीके देखे। शुरुआत में, हर उम्मीदवार के लिए एक अलग बक्सा होता था जहाँ आप अपना वोट डालते थे। फिर, करीब 40 साल तक हम एक ही मतपत्र पर मुहर लगाकर वोट डालते रहे। और अब, हम सब जानते हैं, हम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, यानी ईवीएम का इस्तेमाल करते हैं। यह बदलाव दिखाता है कि हमारा लोकतंत्र कैसे समय के साथ और भी सुविधाजनक और सुरक्षित होता गया है।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षा में सीधे पूछा जाता है कि भारत के पहले आम चुनाव के सामने क्या चुनौतियाँ थीं, इसलिए इन बिंदुओं को अच्छे से समझ लो।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि चुनाव आयोग का गठन या पहले आम चुनाव की चुनौतियाँ। हालाँकि, मतदान के तीनों तरीकों का क्रम और उनका समयकाल याद रखना उपयोगी रहेगा।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है! अक्सर 'पहले आम चुनाव के महत्व' या 'इसे लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर क्यों कहा जाता है' पर सीधे प्रश्न आते हैं। इसके सभी बिंदुओं को अच्छे से समझकर जाना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अनुच्छेद 356 का प्रयोग और उसके विवाद पर अक्सर प्रश्न आते हैं, इसलिए इसे विस्तार से समझें.
आम गलतियाँ — इनसे बचें
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि जब हमारा संविधान बन गया, तो लोकतंत्र स्थापित करना आसान रहा होगा।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर भूल जाते हैं कि पहला चुनाव 1950 में नहीं हो पाया था, जबकि चुनाव आयोग उसी साल बन गया था। यह काम इतना विशाल था कि इसे पूरा होने में दो साल लग गए और चुनाव 1951-52 में हुए।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि ईवीएम पहले से ही इस्तेमाल होती थी, लेकिन नहीं! भारत में चुनाव धीरे-धीरे आधुनिक हुए हैं। शुरुआत में तो बहुत मेहनत और अलग तरीका था।
याद रखने की आसान ट्रिक
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — चुनौती = चुन-चुन के वोट डाला, मतलब बहुत मुश्किल से लोकतंत्र चुना!
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — सोचो, सुकुमार सेन – चुनाव के 'सुकुमार' (कोमल) काम को 'सेन' (सेनापति) की तरह संभाला।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे गाँव में जब पंचायत बैठती है और सब मिलकर फैसला लेते हैं, वो भी एक छोटा सा लोकतंत्र है। अपने स्कूल में जब हम हेड गर्ल/बॉय चुनते हैं, तो हर बच्चे को वोट देने का अधिकार मिलता है, भले ही वह छोटा हो या बड़ा।
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे घर में शादी तय करते समय सारे रिश्तेदारों से राय लेना, कितनी मुश्किल होती है ना सबको एक राय पर लाना?
अभ्यास प्रश्न
अब खुद अभ्यास कीजिए — आज़ादी के बाद भारत के नेताओं ने राजनीति को किस रूप में देखा? शुरुआती चुनावों में कितने प्रतिशत मतदाता साक्षर थे? कई नव-स्वतंत्र देशों ने लोकतंत्र क्यों नहीं अपनाया? भारत में सार्वभौम मताधिकार का प्रयोग 'इतिहास का सबसे बड़ा जुआ' क्यों कहा गया?
अब खुद अभ्यास कीजिए — भारत में चुनाव आयोग का गठन कब हुआ? भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे? पहले आम चुनाव को 1950 में क्यों नहीं आयोजित किया जा सका? पहले आम चुनाव के समय सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को लागू करना दुनिया के लिए एक अनूठी मिसाल क्यों था?
अब खुद अभ्यास कीजिए — ईवीएम का इस्तेमाल भारत में कब से शुरू हुआ? भारत के शुरुआती चुनावों में कितनी मतपेटियों का इस्तेमाल हुआ था? पहले दो चुनावों के बाद मतदान के तरीके में क्या बदलाव आया? भारत के शुरुआती चुनावों में हर उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी क्यों रखी जाती थी?
अब खुद अभ्यास कीजिए — भारत का पहला आम चुनाव किस वर्ष हुआ था? पहले आम चुनाव के समय कितने प्रतिशत मतदाता साक्षर थे? पहले आम चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्या था जिसने इसे अनूठा बनाया? पहले आम चुनाव की सफलता ने दुनिया को लोकतंत्र के बारे में क्या संदेश दिया?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 12 Political Science (Politics in India Since Indepen अध्याय 2 'एक दल के प्रभुत्व का दौर' कहाँ से पढ़ें?Invidya पर इस अध्याय के 6 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।
'एक दल के प्रभुत्व का दौर' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?इस अध्याय के मुख्य विषय: लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती, भारत के पहले आम चुनाव का आयोजन, मतदान के बदलते तरीके, पहले आम चुनाव (1952) का महत्व, पहले तीन चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व, केरल में कम्युनिस्टों की जीत और विवादास्पद बर्खास्तगी।
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