कक्षा 12 Political Science (Contemporary World Politics) अध्याय 1: दो ध्रुवीयता का अंत
आज हम इतिहास के एक ऐसे मोड़ के बारे में बात करने वाले हैं जिसने पूरी दुनिया का नक्शा बदल दिया था। सोचो, जैसे तुम लोग अपने दोस्तों के साथ खेलते हो, एक टीम बनती है, है ना? कभी-कभी दो टीमें इतनी मज़बूत होती हैं कि कोई तीसरी टीम टिक नहीं पाती। ऐसे ही दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया में दो बड़ी 'टीम' बन गईं थीं— एक थी अमेरिका वाली पूंजीवादी (capitalist) टीम, और दूसरी थी सोवियत संघ वाली साम्यवादी (communist) टीम।
▶ वीडियो पाठ देखो🧑🏫 AI सुपर टीचर से पढ़ो⬇ अध्याय PDF📝 प्रश्न-उत्तर PDFइस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
- बर्लिन की दीवार का गिरना और 'दूसरी दुनिया' का अंत
- सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ
- सोवियत प्रणाली की कमियाँ
- गोर्बाचेव के सुधार और सोवियत संघ का विघटन
- सोवियत संघ के विघटन के कारण
- विघटन की परिणतियाँ (परिणाम)
- 'शॉक थेरेपी': साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर संक्रमण
- 'शॉक थेरेपी' के परिणाम
- संघर्ष और तनाव: पूर्व सोवियत गणराज्यों की स्थिति
- भारत और सोवियत संघ/रूस के संबंध
वीडियो पाठ (5 भाग)
अध्याय का सारांश
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने देखा कि कैसे 1989 में बर्लिन की दीवार का गिरना सिर्फ एक दीवार का गिरना नहीं था, बल्कि यह एक विचारधारा, साम्यवादी व्यवस्था और सोवियत संघ के प्रभाव वाली 'दूसरी दुनिया' के अंत की शुरुआत थी। इस घटना ने शीत युद्ध को खत्म किया और जर्मनी को फिर से एक कर दिया, जिससे पूरी दुनिया की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव आया। यह दिखाता है कि जनता की सामूहिक शक्ति कितनी बड़ी होती है।
संक्षेप में — तो बच्चों, सोवियत प्रणाली 1917 की समाजवादी क्रांति से निकली थी, जिसका सपना था पूंजीवाद को खत्म करके एक ऐसा समाज बनाना जहाँ सब बराबर हों। इसमें कम्युनिस्ट पार्टी ही सब कुछ थी, किसी और दल के लिए जगह नहीं थी, और सरकार ही पूरी अर्थव्यवस्था को चलाती थी। शुरुआत में तो इसने अमेरिका को टक्कर दी, खूब तरक्की भी की, खासकर संचार और ऊर्जा के मामले में।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बर्लिन की दीवार के गिरने की तारीख, इसका महत्व और 'दूसरी दुनिया' का अर्थ याद रखें, क्योंकि इससे सीधे प्रश्न आ सकते हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — सोवियत प्रणाली की विशेषताओं पर सीधा प्रश्न आ सकता है, इसलिए 'एकदलीय शासन' और 'राज्य नियंत्रित अर्थव्यवस्था' जैसे बिंदुओं को अच्छे से समझ कर लिखो।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह टॉपिक बोर्ड परीक्षा में अक्सर 3 से 6 नंबर के प्रश्न में पूछा जाता है। सभी कमियों को बिंदुओं में याद रखना और हर बिंदु को कम से कम एक वाक्य में समझाना मत भूलना।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — गोर्बाचेव के सुधारों — पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त — का अर्थ और उनके प्रभावों को विस्तार से समझना बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर इस पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
आम गलतियाँ — इनसे बचें
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह भूल जाते हैं कि बर्लिन की दीवार सिर्फ़ एक शहर को नहीं, बल्कि दो अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक विचारों वाली दुनिया को बाँटती थी।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि सोवियत संघ भी बाकी देशों जैसा ही एक सामान्य देश था। लेकिन नहीं, इसमें कम्युनिस्ट पार्टी ही सब कुछ थी, किसी और दल या विरोध की कोई जगह नहीं थी।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह सोचते हैं कि सोवियत प्रणाली सिर्फ आर्थिक कारणों से गिरी, लेकिन इसकी राजनीतिक और सामाजिक कमियाँ, खासकर आज़ादी का अभाव, बहुत बड़ा कारण थीं।
याद रखने की आसान ट्रिक
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — याद रखो, 'निन-निन, दीवार गिरिन' — जैसे 'उन्नीस सौ नवासी' (1989) में दीवार 'गिरिन' (गिर गई)।
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — सोवियत प्रणाली = 'समाजवाद का सपना, एक पार्टी का राज, सब कुछ सरकार के हाथ' याद रखना।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे आपके घर के आँगन में अगर कोई बड़ी दीवार खड़ी हो जो पूरे मोहल्ले को दो हिस्सों में बाँट दे, और फिर अचानक लोग उसे तोड़ दें तो कैसा लगेगा?
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे हमारे गाँव में अगर सिर्फ प्रधान जी ही सारे फैसले लें और किसी और की न सुनें, तो सोवियत प्रणाली वैसी थी जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी ही सब कुछ तय करती थी।
अभ्यास प्रश्न
अब खुद अभ्यास कीजिए — बर्लिन की दीवार किस शहर में बनी थी? बर्लिन की दीवार कब गिरी? 'दूसरी दुनिया' शब्द से आप क्या समझते हैं? बर्लिन की दीवार के गिरने से शीत युद्ध पर क्या असर पड़ा?
अब खुद अभ्यास कीजिए — सोवियत संघ किस क्रांति के बाद अस्तित्व में आया? सोवियत प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसका विरोध करना था? सोवियत प्रणाली की राजनीतिक धुरी कौन सी पार्टी थी? सोवियत संघ में अर्थव्यवस्था का स्वरूप कैसा था? क्या इसमें निजी संपत्ति को महत्व दिया जाता था?
अब खुद अभ्यास कीजिए — सोवियत संघ में किस पार्टी का शासन था? क्या सोवियत नागरिकों को अपनी बात कहने की आज़ादी थी? सोवियत प्रणाली में 'नौकरशाही के शिकंजे' का क्या अर्थ है? सोवियत प्रणाली में लोकतंत्र की कमी ने किस प्रकार लोगों की आकांक्षाओं को प्रभावित किया?
अब खुद अभ्यास कीजिए — मिखाइल गोर्बाचेव किस दशक में सोवियत संघ के महासचिव बने? गोर्बाचेव के दो मुख्य सुधारों के नाम क्या थे? 'ग्लासनोस्त' का सोवियत संघ की राजनीति पर क्या असर हुआ? 1991 का तख्तापलट असफल क्यों रहा और इसका सोवियत संघ के विघटन पर क्या प्रभाव पड़ा?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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'दो ध्रुवीयता का अंत' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?इस अध्याय के मुख्य विषय: बर्लिन की दीवार का गिरना और 'दूसरी दुनिया' का अंत, सोवियत प्रणाली की विशेषताएँ, सोवियत प्रणाली की कमियाँ, गोर्बाचेव के सुधार और सोवियत संघ का विघटन, सोवियत संघ के विघटन के कारण, विघटन की परिणतियाँ (परिणाम)।
क्या 'दो ध्रुवीयता का अंत' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।
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