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कक्षा 12 Hindi (Antara Bhag 2) अध्याय 1: जयशंकर प्रसाद

अच्छा बच्चों, आज हम एक ऐसे महान कवि और लेखक के बारे में पढ़ने जा रहे हैं, जिनकी रचनाएं पढ़कर हमें गर्व होता है कि हम भारतीय हैं। सोचो, एक ऐसा व्यक्ति जिसने स्कूल की पढ़ाई तो बहुत कम की, लेकिन ज्ञान इतना गहरा कि बड़े-बड़े विद्वान भी हैरान रह जाएं! कैसे संभव है ये? कैसे कोई सिर्फ आठवीं कक्षा तक पढ़कर संस्कृत, अंग्रेजी, इतिहास, दर्शन… इतनी सारी भाषाओं और विषयों का प्रकांड विद्वान बन सकता है?

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इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

वीडियो पाठ (4 भाग)

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अध्याय का सारांश

संक्षेप में — तो बच्चों, जयशंकर प्रसाद जी का जीवन हमें सिखाता है कि सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती. उन्होंने काशी में जन्म लिया और केवल आठवीं तक की स्कूली पढ़ाई की, पर अपनी लगन और स्वाध्याय से वे संस्कृत, पालि, उर्दू, अंग्रेजी जैसी कई भाषाओं और इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र जैसे विषयों के बहुत बड़े विद्वान बने. उनका व्यक्तित्व बड़ा ही शांत, गंभीर और सौम्य था और वे कभी न तो किसी की बुराई करते थे और न ही अपनी तारीफ.
संक्षेप में — तो बच्चों, संक्षेप में कहें तो जयशंकर प्रसाद जी सिर्फ एक कवि ही नहीं थे, बल्कि साहित्य के एक महान पुरोधा थे, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से कविता, नाटक, उपन्यास, कहानियाँ और निबंध जैसी हर विधा में उत्कृष्ट रचनाएँ दीं. उनके साहित्य में हमेशा राष्ट्रीय जागरण और हमारी भारतीय संस्कृति के गौरव की झलक मिलती है. उन्होंने हिंदी साहित्य को इतना कुछ दिया कि आज भी वे हमारे आदर्श बने हुए हैं.

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें

बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — उनके व्यक्तित्व की विशेषताओं पर आधारित प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षा में पूछे जाते हैं, जैसे 'वे परनिंदा और आत्मस्तुति दोनों से सदा दूर रहते थे', इसे याद रखना.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — प्रसाद जी की प्रमुख रचनाओं, विशेषकर 'कामायनी', 'चंद्रगुप्त', 'कंकाल', 'ध्रुवस्वामिनी', 'आकाशदीप' के नाम और उनकी विधाएँ (जैसे महाकाव्य, नाटक, उपन्यास, कहानी) याद रखना बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — बोर्ड परीक्षा में, 'देवसेना का गीत' के प्रसंग और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझाना बहुत ज़रूरी है। सिर्फ़ गीत का भावार्थ लिखने से पूरे अंक नहीं मिलेंगे, आपको यह भी बताना होगा कि यह किस नाटक से है, देवसेना कौन थी और उसके जीवन की क…

आम गलतियाँ — इनसे बचें

रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि अगर कोई कम पढ़ा है तो उसे ज्ञान कम होगा. लेकिन प्रसाद जी के जीवन से हमें सीखना है कि किताबी शिक्षा से ज़्यादा स्वाध्याय (खुद से पढ़ना) का महत्व है.
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर क्या करते हैं ना, कि सिर्फ 'कामायनी' का नाम याद रखते हैं और सोचते हैं कि बस वही उनकी सबसे बड़ी रचना है.
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर क्या करते हैं, इस गीत को सिर्फ एक प्रेम गीत समझ लेते हैं। लेकिन नहीं! यह सिर्फ प्रेम की बात नहीं है, इसमें देशसेवा का बलिदान, जीवन की निराशा और त्याग की भावना भी उतनी ही गहरी है।

याद रखने की आसान ट्रिक

इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — जयशंकर प्रसाद – नाम में 'जय' है ना, मतलब विजय. तो याद रखना, उन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और स्वाध्याय से ज्ञान पर विजय प्राप्त की!
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — अच्छा, एक मज़ेदार बात बताती हूं! 'प्रसाद' मतलब भगवान का दिया हुआ वरदान, है ना? तो याद रखो, उनकी रचनाएं भी साहित्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं थीं — 'क' से कविता (कामायनी), 'न' से नाटक (चंद्रगुप्त), 'उ' से…

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में

इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे हमारे घर में दादी-नानी स्कूल नहीं गई होतीं, पर जीवन का इतना अनुभव और ज्ञान होता है कि हम उनसे सीख पाते हैं.
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे हमारे घर में एक ही डॉक्टर बेटा हो और वह डॉक्टर होने के साथ-साथ अच्छा चित्रकार भी हो, और बढ़िया भजन भी गाता हो - बिल्कुल ऐसे ही प्रसाद जी थे, अनेक प्रतिभाओं के धनी.

अभ्यास प्रश्न

अब खुद अभ्यास कीजिए — जयशंकर प्रसाद जी का जन्म कहाँ हुआ था? उन्होंने कितने कक्षा तक विद्यालयी शिक्षा प्राप्त की थी? विद्यालयी शिक्षा कम होने के बावजूद, वे किन विषयों के प्रकांड विद्वान थे? किन्हीं तीन का नाम बताओ. जयशंकर प्रसाद जी के व्यक्तित्व की दो मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
अब खुद अभ्यास कीजिए — जयशंकर प्रसाद की किस रचना को महाकाव्य कहा जाता है? जयशंकर प्रसाद ने नाटक के अलावा और किन साहित्यिक विधाओं में लिखा है? प्रसाद जी के साहित्य में किस तरह के स्वरों की प्रमुखता है? जयशंकर प्रसाद के किन्हीं दो उपन्यासों और दो कविता संग्रहों के नाम लिखिए।
अब खुद अभ्यास कीजिए — देवसेना का गीत किस लेखक की रचना है? यह गीत जयशंकर प्रसाद के किस नाटक से लिया गया है? हूणों के आक्रमण का देवसेना के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? स्कंदगुप्त के प्रति देवसेना की क्या भावनाएँ थीं और स्कंदगुप्त की प्रतिक्रिया क्या थी?
अब खुद अभ्यास कीजिए — देवसेना अपने जीवन के किस पड़ाव पर खड़ी होकर यह गीत गाती है? देवसेना के प्रेम में क्या हुआ? गीत में देवसेना अपनी किस 'कमाई' को खो देने की बात करती है? पंक्ति 'चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर, प्रलय चल रहा अपने पथ पर।' से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 12 Hindi (Antara Bhag 2) अध्याय 1 'जयशंकर प्रसाद' कहाँ से पढ़ें?

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'जयशंकर प्रसाद' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?

इस अध्याय के मुख्य विषय: जयशंकर प्रसाद: जीवन परिचय, जयशंकर प्रसाद: साहित्यिक योगदान और प्रमुख रचनाएँ, देवसेना का गीत: पृष्ठभूमि और संदर्भ, देवसेना का गीत: केंद्रीय भाव और वेदना, देवसेना का गीत: काव्य शिल्प और भाषा, कार्नेलिया का गीत: पृष्ठभूमि और संदर्भ।

क्या 'जयशंकर प्रसाद' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?

हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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