कक्षा 11 Sociology (Understanding Society) अध्याय 4: भारतीय समाजशास्त्री
आज हम एक बहुत ही दिलचस्प सफर पर निकलने वाले हैं। कभी सोचा है कि हम समाज को कैसे समझते हैं? क्यों लोग अलग-अलग तरह से रहते हैं, खाते हैं, त्योहार मनाते हैं? इन सब सवालों के जवाब हमें समाजशास्त्र में मिलते हैं। और आज हम जानेंगे कि हमारे अपने भारत में यह विषय, 'Sociology', यानी समाजशास्त्र, कब और कैसे शुरू हुआ, और इसे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
▶ वीडियो पाठ देखो🧑🏫 AI सुपर टीचर से पढ़ो⬇ अध्याय PDF📝 प्रश्न-उत्तर PDFइस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
- भारत में समाजशास्त्र का उद्भव और शुरुआती चुनौतियाँ
- एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर: भारत के पहले सामाजिक मानवविज्ञानी
- शरत चंद्र रॉय: जनजातीय समाज के अग्रणी अध्येता
- जी.एस. घूर्ये: भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापक
- घूर्ये के जनजाति पर विचार: 'पिछड़े हिंदू समूह'
- घूर्ये के जाति और प्रजाति पर विचार
- घूर्ये द्वारा जाति की परिभाषा
- डी.पी. मुकर्जी: एक बहुआयामी बुद्धिजीवी
- डी.पी. मुकर्जी के परंपरा और परिवर्तन पर विचार
- ए.आर. देसाई: एक मार्क्सवादी समाजशास्त्री
- ए.आर. देसाई के कल्याणकारी राज्य पर विचार
- एम.एन. श्रीनिवास: ग्रामीण अध्ययन और सामाजिक मानवविज्ञान
- एम.एन. श्रीनिवास के गाँव संबंधी विचार
वीडियो पाठ (6 भाग)
अध्याय का सारांश
संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने समझा कि भारत में समाजशास्त्र की शुरुआत 1919 में बंबई विश्वविद्यालय से हुई। यह सिर्फ पढ़ाई की शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सफर था जहां हमें यह तय करना था कि एक 'उपनिवेश' के तौर पर और 'आधुनिकता' की तरफ बढ़ते हुए समाजशास्त्र हमारे लिए क्या मायने रखता है।
संक्षेप में — तो बच्चों, एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे एक साधारण शुरुआत से भी कोई व्यक्ति महान ऊंचाइयों को छू सकता है। उन्होंने एक क्लर्क से लेकर कोचीन के नृजातीय सर्वेक्षणों में स्वयंसेवक के रूप में काम किया और फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय में भारत के पहले स्नातकोत्तर मानवविज्ञान विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह अवधारणा बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शुरुआती चुनौतियों और औपनिवेशिक संदर्भ में समाजशास्त्र की भूमिका को अच्छे से समझ कर उत्तर दें।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — अय्यर जी के जीवन सफर और कलकत्ता विश्वविद्यालय में उनके योगदान पर सीधे प्रश्न आ सकते हैं, खासकर उनकी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — शरत चंद्र रॉय के योगदान, खासकर 'मैन इन इंडिया' जर्नल की स्थापना और छोटानागपुर की जनजातियों पर उनके अध्ययन के बारे में प्रश्न अक्सर 'long answer questions' में पूछे जाते हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — घूर्ये के योगदान पर बोर्ड परीक्षा में अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। उनके संस्थागत योगदान (विभाग, सोसायटी, जर्नल) और उनके प्रमुख लेखन विषयों को याद रखना बहुत ज़रूरी है।
आम गलतियाँ — इनसे बचें
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह सोचते हैं कि भारत में समाजशास्त्र की पढ़ाई पश्चिमी देशों की तरह ही सीधे-सीधे शुरू हो गई होगी।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर इन्हें सिर्फ एक 'सर्वेक्षणकर्ता' समझ लेते हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में भारत का पहला स्नातकोत्तर मानवविज्ञान विभाग स्थापित किया।
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह सोचते हैं कि शरत चंद्र रॉय शुरू से ही मानवविज्ञानी थे। नहीं बच्चों, वो 'accidentally became an anthropologist' यानी संयोग से मानवविज्ञानी बने थे।
याद रखने की आसान ट्रिक
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — याद रखो '1919, बॉम्बे में समाजशास्त्र की नींव रखी', बस इतना याद रहेगा तो साल और जगह हमेशा याद रहेगी!
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — अय्यर, 'आ' से 'आरंभ' और 'आ' से 'अनुसंधान'। मतलब, इन्होंने ही अनुसंधान का आरंभ किया।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे जब तुम्हारे गाँव में पहली बार कोई नई मशीन या तकनीक आती है, तो पहले-पहले सबको उसे समझने में, चलाने में और उसकी ज़रूरत पहचानने में समय लगता है। कुछ ऐसी ही शुरुआत थी समाजशास्त्र की।
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे कोई छोटा किसान खेती करते-करते अपनी मेहनत से बहुत बड़ा ज़मींदार बन जाए, ठीक वैसे ही अय्यर जी का सफर था। तुम्हारे गाँव में कोई ऐसा व्यक्ति जो दसवीं पास करके भी, अपनी लगन से सरकारी नौकरी पाकर बहुत ऊपर चला जाए।
अभ्यास प्रश्न
अब खुद अभ्यास कीजिए — भारत में समाजशास्त्र की औपचारिक शिक्षा किस वर्ष शुरू हुई? बंबई के अलावा, किन दो अन्य विश्वविद्यालयों ने 1920 में समाजशास्त्र और मानवविज्ञान में शिक्षण और शोधकार्य शुरू किया?
अब खुद अभ्यास कीजिए — एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर ने अपने करियर की शुरुआत किस पद से की थी? उन्हें किस रजवाड़े के नृजातीय सर्वेक्षण में मदद के लिए बुलाया गया था? अय्यर जी का भारत में मानवविज्ञान के लिए सबसे महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान क्या था?
अब खुद अभ्यास कीजिए — शरत चंद्र रॉय मुख्य रूप से किस पेशे से जुड़े थे? उन्होंने किस क्षेत्र की जनजातियों का गहन अध्ययन किया? शरत चंद्र रॉय को भारत में मानवविज्ञान के क्षेत्र में 'पायनियर' क्यों माना जाता है? शरत चंद्र रॉय ने 'मैन इन इंडिया' नामक जर्नल की स्थापना क्यों की और इसका क्या महत्व था?
अब खुद अभ्यास कीजिए — जी.एस. घूर्ये ने किस विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना की? 'इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी' के संस्थापक अध्यक्ष कौन थे? जी.एस. घूर्ये के दो प्रमुख लेखन विषयों के नाम बताइए। जी.एस. घूर्ये को 'भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापक' क्यों कहा जाता है? विस्तार से समझाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 11 Sociology (Understanding Society) अध्याय 4 'भारतीय समाजशास्त्री' कहाँ से पढ़ें?Invidya पर इस अध्याय के 6 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।
'भारतीय समाजशास्त्री' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?इस अध्याय के मुख्य विषय: भारत में समाजशास्त्र का उद्भव और शुरुआती चुनौतियाँ, एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर: भारत के पहले सामाजिक मानवविज्ञानी, शरत चंद्र रॉय: जनजातीय समाज के अग्रणी अध्येता, जी.एस. घूर्ये: भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापक, घूर्ये के जनजाति पर विचार: 'पिछड़े हिंदू समूह', घूर्ये के जाति और प्रजाति पर विचार।
क्या 'भारतीय समाजशास्त्री' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।
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