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कक्षा 11 Economics (Indian Economic Development) अध्याय 7: उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण: एक समीक्षा

आज हम एक बहुत ही ज़रूरी और दिलचस्प अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, जो हमारे देश के इतिहास में एक बड़े बदलाव का मोड़ था. आपने कभी सोचा है कि जब हमारे घर में पैसे की कमी हो जाए, या कर्ज़ बहुत बढ़ जाए, तो हमें कैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है? बिल्कुल ऐसी ही स्थिति में, हमारा देश भारत भी 1991 में फँस गया था.

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इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

वीडियो पाठ (6 भाग)

▶ भाग 1▶ भाग 2▶ भाग 3▶ भाग 4▶ भाग 5▶ भाग 6

अध्याय का सारांश

संक्षेप में — तो बच्चों, आज हमने समझा कि 1991 का आर्थिक संकट क्या था और इसके पीछे क्या-क्या कारण थे. मुख्य रूप से, सरकार के बढ़ते खर्चे, दूसरे देशों से लिया गया भारी कर्ज़, विदेशी मुद्रा का लगभग खत्म हो जाना, और देश में तेज़ी से बढ़ती महंगाई, इन सभी ने मिलकर भारत को एक बहुत मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया था. यह कोई अचानक नहीं हुआ था, बल्कि 1980 के दशक के आर्थिक कुप्रबंधन का ही नतीजा था.
संक्षेप में — बच्चों, तो हमने देखा कि 1991 का वित्तीय संकट कोई एक दिन की बात नहीं थी, बल्कि इसकी जड़ें 1980 के दशक के कुप्रबंधन में थीं. जब सरकार की कमाई कम थी और खर्चे बढ़ते गए, खासकर उपभोग पर, तो हमें भारी कर्ज़ लेना पड़ा. विदेशी मुद्रा भी कम होती गई और अंततः हमें अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मदद मांगनी पड़ी. उनकी शर्तों को मानते हुए ही भारत ने नई आर्थिक नीति अपनाई, जिसके बारे में हम आगे और विस्तार से जानेंगे.

परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें

बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा में अक्सर 3 से 5 अंकों के प्रश्न में पूछा जाता है, जहाँ आपको संकट के कारणों को विस्तार से समझाना होता है. इसलिए इसके सभी बिंदुओं को अच्छे से समझकर याद करें.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह प्रश्न सीधे बोर्ड परीक्षा में आ सकता है कि '1991 के वित्तीय संकट का मूल कारण क्या था और भारत सरकार ने क्या प्रतिक्रिया दी?' इसे अच्छे से तैयार कर लेना.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह प्रश्न सीधे-सीधे बोर्ड परीक्षा में पूछा जा सकता है कि 1991 के आर्थिक सुधारों के पीछे क्या कारण थे और विश्व बैंक/IMF की क्या शर्तें थीं। इसलिए इन शर्तों को अच्छे से समझकर याद रखना.
बोर्ड परीक्षा के लिए ध्यान रखिए — यह विषय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्थायित्वकारी और संरचनात्मक उपायों के बीच का अंतर और उनके उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझो और उदाहरणों सहित याद रखो।

आम गलतियाँ — इनसे बचें

रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर यह सोचते हैं कि 1991 का संकट अचानक आ गया था, जबकि असल में यह 1980 के दशक के आर्थिक कुप्रबंधन का ही परिणाम था. यह एक रात में नहीं हुआ था, बल्कि कई सालों से हालात बिगड़ रहे थे.
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि ये संकट सिर्फ 'पैसे खत्म' होने की वजह से आया. लेकिन नहीं, इसकी जड़ें सरकार के लंबे समय तक सही ढंग से खर्च न कर पाने, सिर्फ चलाने वाले खर्चों पर ध्यान देने और आय बढ़ाने…
रुकिए — यहाँ ज़्यादातर बच्चे यह गलती करते हैं। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि ये शर्तें बस पैसे लेने के लिए थीं, लेकिन असली बात यह थी कि ये शर्तें भारत को आर्थिक सुधारों की ओर धकेलने के लिए थीं.

याद रखने की आसान ट्रिक

इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — इसे ऐसे याद रखो: 'ऋण, रिजर्व, और दाम – 91 में बिगड़े थे काम!'
इसे याद रखने की एक आसान तरकीब है — सोचो: '80 के दशक की 'अकुशल आदतें', 90 में बनी 'आफतें'.

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में

इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे घर का बजट बिगड़ जाए, खर्च ज़्यादा और आमदनी कम हो. किसी पड़ोसी से बहुत सारा उधार ले लिया हो और चुका न पा रहे हों. घर में राशन लाने के लिए पैसे न बचे हों, सिर्फ 15 दिन का ही सामान हो.
इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ऐसे समझिए — जैसे घर में अगर पिताजी की कमाई कम हो जाए और खर्च बढ़ते जाएं, तो एक दिन ऐसा आता है जब घर चलाने के लिए कर्ज़ लेना पड़ता है.

अभ्यास प्रश्न

अब खुद अभ्यास कीजिए — 1991 के आर्थिक संकट के समय भारत के पास कितने दिनों के आयात के लिए विदेशी मुद्रा बची थी? विदेशी ऋण क्या होता है? 1991 के संकट का मूल कारण 1980 के दशक में क्या माना जाता है? विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने से देश पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
अब खुद अभ्यास कीजिए — 1991 के वित्तीय संकट का मुख्य कारण क्या था? सरकार को कर्ज़ कब लेना पड़ता है? भारत ने वित्तीय संकट से निकलने के लिए किन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मदद माँगी? विश्व बैंक और IMF ने भारत को कर्ज़ देने के लिए क्या शर्तें रखी थीं?
अब खुद अभ्यास कीजिए — 1991 में भारत को कर्ज़ क्यों लेना पड़ा? विश्व बैंक और IMF द्वारा लगाई गई एक शर्त बताओ। उदारीकरण से क्या अभिप्राय है, जैसा कि इन संस्थाओं ने चाहा था? इन शर्तों का भारत की आर्थिक नीति पर क्या दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा?
अब खुद अभ्यास कीजिए — भुगतान संतुलन की समस्या को ठीक करने वाले उपाय किस श्रेणी में आते हैं? अर्थव्यवस्था की दक्षता सुधारने के लिए कौन-से उपाय किए जाते हैं? मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करना 'स्थायित्वकारी उपाय' क्यों है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 11 Economics (Indian Economic Development) अध्याय 7 'उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण: एक समीक्षा' कहाँ से पढ़ें?

Invidya पर इस अध्याय के 6 वीडियो पाठ, AI सुपर टीचर, मुफ़्त PDF और प्रश्न-उत्तर — सब एक जगह, बिना किसी शुल्क के।

'उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण: एक समीक्षा' अध्याय में कौन-कौन से मुख्य विषय हैं?

इस अध्याय के मुख्य विषय: 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि, वित्तीय संकट का मूल और सरकार की प्रतिक्रिया, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण की शर्तें, नई आर्थिक नीति के मुख्य घटक: स्थायित्वकारी और संरचनात्मक उपाय, उदारीकरण: अर्थ और औद्योगिक क्षेत्र सुधार, वित्तीय क्षेत्र सुधार।

क्या 'उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण: एक समीक्षा' की PDF और प्रश्न-उत्तर मुफ़्त हैं?

हाँ। अध्याय की PDF और प्रश्न-उत्तर invidya.in पर मुफ़्त डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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